BREKING NEWSCONGRESHCONGRESH CGRIAPURRIAPUR BREKING NEWSखाद्य विभागछत्तीसगढ़छत्तीसगढ़नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंतरोजगारलाइफस्टाइलविधायकव्यापारशिक्षा

राज्य को 8- हज़ार करोड़ का नुकसान – डॉ चरणदास महंत

The state has suffered a loss of Rs 8-thousand crores - Dr Charandas Mahant

 

The Narad News 24,,,,, रायपुर में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 149 लाख 25 हजार मी. टन धान का समर्थन मूल्य पर उपार्जन किया जाना बताया जा रहा है। जबकि खरीफ 2024 में पूरे प्रदेश में धान का कुल उत्पादन ही कृषि विभाग द्वारा 110 लाख 11 हजार मी. टन प्रतिवेदित है। यह असंभव है कि कुल उत्पादन से 36% अधिक धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी मात्रा के अतिरिक्त कृषि उपज मंडियों में भी लगभग 15 लाख मी. टन धान का विपणन हुआ है। धान उत्पादन की सम्पूर्ण मात्रा का बाजार में विपणन होता भी नहीं है। किसानों के द्वारा प्रमाणित बीज उत्पादन योजना के अन्तर्गत भी लाखों टन धान दिया जाता है और अपने परिवार के खाने के लिए भी बड़ी मात्रा में धान का उपयोग किया जाता है।

खाद्य विभाग के द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अनुमानित मात्रा 160 लाख मी. टन थी। खरीफ 2023 सीजन में धान का कुल उत्पादन 100 लाख 30 हजार मी. टन था। उत्पादन की इस मात्रा के आधार पर खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए समर्थन मूल्य पर उपार्जन की मात्रा का अनुमान लगाया जाना चाहिए था जो कि नहीं लगाकर वास्तविकता से बहुत अधिक लगाया गया। खरीफ 2024 के धान उत्पादन की औसत मात्रा ज्ञात करने के लिए फसल बीमा योजनान्तर्गत प्रत्येक ग्राम में क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट किया जाता है, जो पूरी तरह से वैज्ञानिक विधियों पर आधारित होता है और इसके परिणाम को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। पूरे प्रदेश में किये गये क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के परिणामों के अनुसार धान का औसत उत्पादन 12 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक नही है। इस परिणाम से तुलना करने पर भी धान का कुल उत्पादन लगभग 110 लाख मी. टन ही होता है उपार्जन की अनुमानित मात्रा 160 लाख मी. टन बहुत अधिक होने के कारण धान खरीदी केन्द्र प्रभारियों, राईस मिलर्स और दलालों को मिली भगत करके किसानों से वास्तविकता से

1

अधिक धान की खरीदी करने का फर्जीवाड़ा करने का सुअवसर प्राप्त हो गया। धान उत्पादन की वास्तविक मात्रा से बहुत अधिक खरीदी बताए जाने के कारण ही केन्द्रीय पूल में 70 लाख मी. टन से अधिक चावल नहीं लिया गया। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि 40 लाख मी. टन धान का खुले बाजार में विक्रय करना पड़ रहा है। इस विक्रय से 8000 करोड़ की हानि अनुमानित है। इसका पूरा भार राजकोष पर ही आएगा। धान की 50 लाख मी. टन फर्जी खरीदी की मात्रा पर धान का राईस मिल तक परिवहन चार्ज, मंडी लेबर चार्ज (हमाली), सोसाइटी कमीशन, मंडी टैक्स आदि, बारदाना उपयोग, सुरक्षा एवं रख-रखाव व्यय, प्रशासनिक व्यय, बैंक ब्याज, मिलिंग चार्जेस, चावल परिवहन चार्ज आदि का भी आर्थिक भार आएगा, जिसकी अनुमानित राशि कम से कम 3000 करोड़ रूपये होगी। फर्जी मात्रा पर 800 रूपये प्रति क्विंटल की दर से बोनस की राशि 4000 करोड़ रूपये होती है। इस प्रकार राजकोष पर अनावश्यक और अतिरिक्त भार लगभग 15000 करोड़ रूपयें आएगा। यह इतनी बड़ी हानि है जो राज्य की अर्थव्यवस्था को हिला देगी। अतः सदन की कार्यवाही रोककर इस गंभीर विषय पर चर्चा कराने की अनुमति प्रदान करे।

The Narad News 24

The Narad News

भ्रष्टाचारियो,भूमाफियाओं,नशे के सौदागरों, समाज में धार्मिक उन्मादता फैलाने वालों, मोब लॉचिंग करने वालों, पशु क्रूरता करनेवालों, भ्रष्ट राजनेताओं, लापरवाह अधिकारी,कर्मचारियों, किसानों एवं वंचित समाज के लोगों का शोषण करने वालों के खिलाफ हमारी मुहिम (प्रतीक सेंगर)8878141022,9685662222

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker