सरकार अंततः गौठानो का नाम बदलकर शुरू करने मजबूर हुई – कांग्रेस

The narad news 24,,,,,,,रायपुर/03 जून 2026। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के द्वारा आरंभ किए गए गौठान योजना का नाम बदलकर 1400 गौधाम के नाम से संचालित करने के निर्णय को भाजपा सरकार का यू-टर्न है। प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार अंततः गौठानो का नाम बदलकर शुरू करने मजबूर हुई। ढाई साल बाद ही सही यह सरकार जागी तो सही। जो लोग राजनैतिक दुर्भावनावश गौठान का विरोध कर रहे थे, विगत ढाई वर्षाे में स्वयं की कोई योजना ला नहीं सके, अब गौ-वंशी पशुओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए वापस उन्हें गौठानो का आश्रय लेना पड़ रहा है। चुनाव के समय जो गौ-माता के नाम पर वोट मांगते हैं, वही भाजपाई उन्हें अब आवारा पशु कह रहे हैं। भाजपा सरकार की अकर्मण्यता और दुर्भावनापूर्ण निर्णय से 10 हजार से अधिक गौठानो में ताले लगे और किसके चलते सैकड़ो की संख्या में गाय सड़क पर कुचलकर मार दी गई उस पाप के लिए यह सरकार ही जिम्मेदार है।

प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि गौठान योजना बंद करने का दुष्परिणाम सड़कों पर दिख रहा है, सड़कों पर मवेशियों की मौत और रोज-रोज हादसों हो रहे। भाजपा सरकार की उपेक्षा, पूर्वाग्रह और दुर्भावना के चलते ही गायें सड़कों पर कुचली जा रही हैं, किसान खुली चराई से परेशान हैं और राहगीर भी दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। भाजपा गाय, गोबर और गौ-मूत्र के नाम पर केवल राजनीति करती है, असलियत यह है कि विगत डेढ़ साल से अधिक समय में छत्तीसगढ़ में गौवंशी पशुओं की संख्या तेजी से घट रही है, गौ-तस्करी बढ़ी है, सड़क दुर्घटनाओं के तादाद में बेतहाशा वृद्धि हुई है। नगरीय निकायों, पंचायत और हाईवे अथॉरिटी में आपस में समन्वय नहीं है जमीनी स्तर पर यह सरकार कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं कर पाई, इसी की वजह से हादसे थमने का नाम नहीं ले रहा है।
प्रदेश कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि पशुपालकों पर एफआईआर सरकार अपना विफलता पर पर्दा करने कर रही है। गैर बीमित पशुओं के मालिकों को चिन्हित करना आसान नहीं है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान गोबर और गौ-मूत्र खरीदी की वजह से गौ-वंशी पशु बांध कर रखे जाते थे, अब दूसरे गांव और सड़कों पर खुले घूम रहे हैं। कांजी हाउस खाली पड़े हैं। भाजपा की सरकार की गौ संरक्षण को लेकर ना कोई नीति है, ना ही नियत। नई व्यवस्था तो छोड़िए पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ में स्थापित 10 हजार से अधिक गौठान जिसमें से लगभग 8 हजार गौठान आत्मनिर्भर हो चुके थे, गौठान समिति और महिला स्व-सहायता समूहों के द्वारा संचालित होने वाली उस सुव्यवस्थित योजना के संचालन में भी यह सरकार नाकाम रही। भाजपा की सरकार केवल मोटे कमीशन के लालच में गौ-अभ्यारण की बात कर रही है, असलियत यह है कि भाजपा शासित अन्य राज्यों में गौ-अभ्यारण की योजना पूरी तरह असफल हो चुकी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की डबल इंजन सरकारों में गौ-अभ्यारण योजना दम तोड़ चुकी है। मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में भाजपा की सरकार चला नहीं पाई और गौ-अभ्यारण को एनजीओ को सौंप दिया है। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के द्वारा स्थापित गौठानो की ये आलोचना करते थे, अब नाम बदलकर गौधाम चालू करने मजबूर हुए।



