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रीढ़ की सेहत उम्र भर के लिए: छोटी आदतें जो सालों तक आपकी पीठ को सुरक्षित रखती हैं

डॉ. घनश्याम बिसन ससापरधी, कंसलटेंट , न्यूरोसर्जरी, एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर

THE NARAD NEWS 24 ,,,,क्लिनिक में मेरे पास ऐसे कई लोग आते हैं जिन्होंने तीस साल तक अपनी रीढ़ का ध्यान नहीं रखा, और अब दस मिनट सिर्फ़ पीठ दर्द की शिकायत करते रहते हैं। सच यह है कि रीढ़ अचानक खराब नहीं होती। यह रोज़ की छोटी-छोटी हरकतों के हज़ारों बार दोहराए जाने का नतीजा होती है। अच्छी बात यह है कि इन आदतों को बदला जा सकता है।

रीढ़ चलने-फिरने के लिए बनी है

 

रीढ़ में 24 गतिशील कशेरुकाएँ (वर्टिब्रा) होती हैं। ये डिस्क से जुड़ी होती हैं और मांसपेशियाँ इन्हें थामे रखती हैं। रीढ़ को हरकत का बोझ उठाने के लिए ही बनाया गया है। डिस्क में खून की नलियाँ नहीं होतीं, इसलिए उन्हें पोषण तभी मिलता है जब शरीर हरकत में हो। इसीलिए रोज़ 8 घंटे पैदल चलने वाले व्यक्ति को रीढ़ की परेशानी, 9 घंटे बिना हिले बैठे रहने वाले दफ़्तर के कर्मचारी से कम होती है। दफ़्तर में काम करने वाले को रीढ़ पर पड़ने वाले भारी बोझ से ज़्यादा नुकसान एक ही स्थिति में बैठे रहने से होता है।

 

बिल्कुल सही मुद्रा जैसी कोई चीज़ नहीं होती

 

कोई एक आदर्श मुद्रा नहीं होती। सही तरीके से बैठने पर भी दो घंटे बाद पीठ दर्द करने लगती है। इसलिए हर 30 से 45 मिनट में अपनी स्थिति बदलें। खड़े हों, थोड़ा चलें, पानी पिएँ। बैठते समय कंप्यूटर की स्क्रीन या किताब आँखों की सीध में रखें। फ़ोन को भी नीचे झुककर देखने के बजाय आँखों की सीध में उठाकर देखें। सिर का वज़न लगभग 4 से 5 किलो होता है, इसलिए गर्दन झुकाने पर नीचे की कशेरुकाओं पर बोझ बढ़ जाता है। तनाव कम करने के लिए कंधों को पीछे की ओर घुमाएँ और दूर देखें।

 

कोर की मांसपेशियों को मज़बूत करें

 

पेट, पीठ और कूल्हों की मांसपेशियों को एक पट्टे (कॉर्सेट) की तरह समझिए। ये मांसपेशियाँ कमज़ोर हों तो पूरा बोझ रीढ़ पर आ जाता है। कोर को मज़बूत करने के लिए सरल व्यायाम करें। चारों हाथ-पैरों के बल (घुटनों और हथेलियों पर) आकर धड़ को बाएँ और दाएँ घुमाएँ और पीठ को कसकर सीधा रखें। शुरुआत करने वालों के लिए प्लैंक, ब्रिज और स्क्वैट अच्छे हैं। ये व्यायाम हफ़्ते में 3 बार करें और हर व्यायाम 12 बार दोहराएँ।

 

भारी सामान सही तरीके से उठाएँ

 

बहुत सी चोटें गलत तरीके से वज़न उठाने से होती हैं। चाहे बाज़ार से लाया हुआ सामान हो या एयरपोर्ट पर सूटकेस, मुख्य बात यह है कि पीठ पर बेवजह ज़ोर न पड़े। सही तरीका यह है कि घुटने मोड़कर नीचे झुकें, सामान को शरीर के पास से पकड़ें और सीधे ऊपर उठाएँ। वज़न जितना कम होगा, रीढ़ पर उतना ही कम ज़ोर पड़ेगा।

 

नींद, खान-पान और धूम्रपान

 

नींद की आदतें सुधारना ज़रूरी है, क्योंकि अनुपयुक्त बिस्तर पर बहुत देर तक सोने से पीठ दर्द हो सकता है। करवट लेकर सोते समय दोनों घुटनों के बीच तकिया रखना अच्छा रहता है। पीठ के बल सोते समय घुटनों के नीचे गोल तकिया या बोलस्टर रखने से रीढ़ पर दबाव कम होता है। ज़्यादा वज़न से पीठ दर्द बढ़ता है, ख़ासकर तब जब पेट की मांसपेशियों पर बोझ पड़ता है। कुछ किलो वज़न घटाने से भी काफ़ी फ़ायदा होता है। आख़िर में, ज़्यादा धूम्रपान से बचें, क्योंकि निकोटीन खून की नलियों को सिकोड़ देता है और रीढ़ तक पोषक तत्वों से भरपूर खून कम पहुँचता है।

 

डॉक्टर को कब दिखाएँ

 

पीठ दर्द आमतौर पर व्यायाम से एक-दो हफ़्ते में ठीक हो जाता है। लेकिन अगर दर्द किसी चोट या हादसे की वजह से हुआ है, तो वह लंबे समय तक रह सकता है। ऐसे में कुछ हफ़्तों बाद भी तकलीफ़ बनी रहे तो अपने डॉक्टर से मिलें। अगर कमर से पैर तक दर्द, सुन्नपन या कमज़ोरी फैल रही हो, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

 

बेहोशी, सीने की हड्डी के पीछे दर्द, जी मिचलाना या उल्टी बहुत ज़्यादा ब्लड प्रेशर के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा चलते समय दर्द, कमज़ोरी, और पेरिनियम या जाँघों के जोड़ के आसपास सुन्नपन होना भी डॉक्टर को दिखाने के कारण हैं। चोट या झटके के बाद तेज़ पीठ दर्द होना भी चिंता की बात है।

 

जीवन भर का निवेश

 

आपकी रीढ़ ज़िंदगी भर आपका साथ देती आई है, और सही देखभाल मिलने पर आगे भी देती रहेगी। इसे बचाने वाली बातें मुश्किल नहीं हैं: ठीक से बैठें, खूब चलें-फिरें, मांसपेशियाँ मज़बूत करें, सावधानी से वज़न उठाएँ और जब शरीर कोई संकेत दे तो उसे अनसुना न करें। इनमें ज़्यादा समय नहीं लगता, लेकिन मिलकर ये सालों का आराम, चलने-फिरने की आज़ादी और आत्मनिर्भरता देती हैं। इसलिए दर्द के याद दिलाने का इंतज़ार न करें। आज से शुरू करें, नियमित रहें, और कोई शंका हो तो समय रहते विशेषज्ञ से मिलें। आपका भविष्य का स्वरूप इस अच्छे निवेश के लिए आपका धन्यवाद करेगा।

The Narad News 24

दा नारद न्यूज 24 The Narad News

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