नख से शीश तक बहु उपयोगी तेल तरल पदार्थ बहु उपयोगी तेल मानव जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है,,,नारायण लाल साहू
Multi-purpose oil liquid from nails to head, multi-purpose oil is an essential necessity of human life,,, Narayan Lal Sahu
The Narad News 24,,,, रायपुर में तरल पदार्थ बहु उपयोगी तेल मानव जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है. जिस तरह जल के बिना मानव जीवन अधूरा है, ठीक उसी तरह से तेल के बिना मानव जीवन अधूरा है. मनुष्य के नख से सिर तक कोई उपयोगी है तो वह है तरल पदार्थ, बहु उपयोगी, विभिन्न प्रकार के विविध तेल. मानव अंगों के सबसे नीचे भाग पैर होता है और पैर के नीचे हिस्से तलवे है. तलवे पर तेल लगाओ और दीर्घायु उम्र पाओ, ये कहावत सदियों से चरितार्थ है, हमारे ऋषि मुनियों ने सोच समझ कर, शोध करने के पश्चात यह मुहावरा कहा है, जो आज भी जन जन में प्रचलित है.
मानव धर्म को समझंने वाले, स्वस्थ शरीर बनाये रखने, बलिष्ट् और हृतपुष्ट रहने के लिए शरीर के प्रत्येक अंग को तेल से मालिस किया करते थे, कुछ लोग आज भी पुरे शरीर में तेल का उपयोग करते हैं, मालिस करते हैं. तेल चाहे तिल का हो, सरसों का हो या फिर फल्ली का. लेकिन आज भी लगाते हैं. पैर के पीछे हिस्सा एडी मे तेल लगाने से एडी का हिस्सा कभी फटता नहीं, दरार जैसा नहीं दिखता. पैर के घुटना मे तेल लगाने से घुटना हमेशा लचिलापन होता है और घुटने मे दर्द नहीं होता. आज घुटने दर्द के मरीजों की लंबी लंबी लाइन अस्पतालों में देखने को मिल रहा है, जिसके अधिकांशतः कारण तेल का मालिश नहीं करना है. इसी तरह कमर को मजबूत बनाने के लिए तेल लगाया जाता और मालिश किया जाता, जिससे कमर दर्द नहीं होता था, लेकिन आज पाश्चात्य सभ्यता के अंधाधुन अनुपालन के कारण अपने पुराने अमृत तुल्य तेल लगाने से विमुख हो रहे हैं. पेट मानव शरीर का मध्य भाग है, जन्म से मृत्यु तक पेट, प्रति दिन के दैंनदिनी जीवन का मूल आधार पेट है. जन्म से पहले जीवन का आहार नेरवा के द्वारा पेट से ही मिलता है, इसलिए इस अंग मे तेल का मालिश नेरवा कटते ही किया जाता है.नेरवा के जगह पर तेल लगाने से शरीर के बाह्य भाग के साथ साथ अंदर भाग में भी प्रभाव होता है. इसलिए आज भी, जब भी पेट का दर्द होता है तो तेल से मालिश तेल कर्म किया जाता है. शरीर के सीना को हृष्ट पुष्ट बनाना है तो तेल लगाना और उस स्थान को मालिश किया जाना अति आवश्यक है हृदस्य, हृदय रोगी आज के आम बीमारी हो गए हैं, इससे बचाने और बचने का उपाय सिर्फ और सिर्फ शुद्ध तेल का उपयोग है. गले से संबंधी थाईराइड बीमारी घर घर पहुँच गया है. इसके रोकथाम के लिए जिंदगी भर टेबलेट खाओ, सिर्फ रोक कर रखें रहेंगे, पूर्ण रोग को समाप्त नहीं करेंगे, ये आज की स्थिति है.
तेल न लगाने की थोड़ा सी लापरवाही, जिंदगी भर की बीमारी का मुख्य कारण बन जाता है. कान के छेद मे दो दो बून्द तेल दो चार दिन में अवश्य डालना चाहिए, ताकि कान के अंदर का धूल मिट्टी आदि जमे का सफाई हो सके, और कान सही सलामत रहे, आवाज सुनने मे कोई तकलीफ न हो. मस्तक और सिर, शरीर का ऊपरी हिस्सा है. यह अंग सबसे नाजुक और संसेटिव होता है, मन इंद्रियों, बुद्धि विचारों को ग्रहण कर अन्य अंगो को कार्यशील , गतिशील प्रदान करते हैं. सिर की मालिश बहुत ही जरूरी है. शिखा का महत्व सभी सनातन धर्म, संस्कृति के माननेवाले अच्छे से जानते हैं, अधिक बताने की जरूरत नहीं है. सिर मे तेल लगाने से बौद्धकालीन सभ्यता के स्मृति में बौद्धिक छमता, ज्ञान, पोषित होता है. आज भी प्राय: स्नान, ध्यान के बाद तेल लगा ही लेते हैं, जो हमे संश्कार के रूप मे मिला है. अत: तेल की महत्व को ध्यान में रखते हुए हमे कौन सा तेल लगाना है, यह भी जानना जरूरी है. आज बाजार मे मिलावट तेल सहज और सब जगह मिल रहा है, हम सब जो तेल उपयोग करते हैं बाजार का मिलावट तेल ही उपयोग कर रहे हैं, इससे बचना और बचाना अति आवश्यक है. आज शुद्ध अमृत तुल्य तेल मिल रहा है, बस उसे जानने और वहाँ तक पहुँचने की जरूरत है. कच्चा घानी तेल, मिलेटस, आदि मिलने लगा है, अपने आँखों के सामने तेल निकाला जा रहा है, ऐसे तेल मशीन को देखें, जाने, अभी बहुत जगह तेल निकाले जा रहे हैं, इसमें से एक कर्मा धाम कृष्णा नगर में कर्मा मन्दिर के नीचे सभा हाल, भवन मे तेल का मशीन लगा है, शुद्ध अमृत तुल्य तेल प्राप्त कर सकते हैं और होने वाले सभी बीमारी से भी बचा जा सकता है.
हमे स्वयं जागरूक होना है, कोई दूसरा हमे जागरूक कराए, यह सोच आत्मघाती है.
नारायण लाल साहू
रोहिनीपुरम, रायपुर
Mo 9009190075


