बस किराये में बढ़ोतरी जनता पर अत्याचार – कांग्रेस एक साल में 75 प्रतिशत किराया बढ़ाया गया
छत्तीसगढ़ में साधारण बसों का किराया लगभग 40 प्रतिशत बढ़ाना जनविरोधी फैसला

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी
प्रेस विज्ञप्ति
The narad news 24,,,,,,रायपुर,,,,,/19 अक्टूबर 2026। बस किराये में बढ़ोत्तरी जनता पर अत्याचार। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि एक साल में दो बार में 75 प्रतिशत किराया बढ़ाया गया। छत्तीसगढ़ में साधारण बसों का किराया फिर से लगभग 40 प्रतिशत बढ़ाना जनविरोधी फैसला है। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों के किराये में भारी बढ़ोतरी कर भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे गरीब, मजदूर, किसान, कर्मचारी, विद्यार्थी और मध्यमवर्गीय परिवारों पर सरकार ने अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। ’बस किराया बढ़ाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में संघर्ष कर रहे लाखों यात्रियों की जेब पर सीधा हमला है।’

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि परिवहन विभाग की नई दरों के अनुसार साधारण बसों का किराया 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 1.75 रुपये प्रति किलोमीटर किया गया है। यानी प्रति किलोमीटर 50 पैसे और लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी। नई दरों के लागू होने से नौकरी, पढ़ाई, इलाज और कारोबार के लिए नियमित यात्रा करने वाले लोगों का मासिक खर्च बढ़ेगा।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकार बताए कि गरीब मजदूर रोज काम पर जाने के लिए बढ़ा हुआ किराया कहां से लाएगा? विद्यार्थी अपनी पढ़ाई का खर्च कैसे संभालेंगे? छोटे व्यापारी और नौकरीपेशा लोग बढ़ती महंगाई के बीच अपने परिवार का बजट कैसे चलाएंगे? क्या सरकार ने किराया बढ़ाने से पहले इन वर्गों की आर्थिक स्थिति का आकलन किया?
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि त्योहारों के समय, जब बड़ी संख्या में लोग अपने परिवारों से मिलने और जरूरी कामों के लिए यात्रा करते हैं, तब किराये में बढ़ोतरी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। सरकार एक ओर जनकल्याण की बात करती है, दूसरी ओर आम आदमी की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी यात्रा को महंगा कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि राज्य सरकार बस किराये में की गई बढ़ोतरी की समीक्षा करे, आम यात्रियों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव का सार्वजनिक आकलन प्रस्तुत करे और किराया वृद्धि वापस लेने पर तत्काल निर्णय ले। सरकार को बस संचालकों की समस्याओं का समाधान भी पारदर्शी तरीके से करना चाहिए, लेकिन उसका पूरा बोझ आम जनता पर डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं



