अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी – एनएचएम कर्मचारियों का अनोखा प्रदर्शन
Indefinite agitation continues – Unique demonstration by NHM employees

The Narad News 24,,,रायपुर | अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी – एनएचएम कर्मचारियों का अनोखा प्रदर्शन
मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों का मुखौटा पहनकर एनएचएम कर्मचारियों ने सरकार को उसके अधूरे वादों की याद दिलाई। उन्होंने “मोदी की गारंटी” और राज्य सरकार के आश्वासनों पर सवाल उठाते हुए जनता के सामने सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
20 वर्षों की सेवा, फिर भी अधिकारों से वंचित
पिछले दो दशकों से संविदा पर कार्यरत एनएचएम कर्मचारी कोरोना काल में फ्रंटलाइन वॉरियर्स रहे। इसके बावजूद आज तक उन्हें नियमितीकरण, न्यायोचित अधिकार और सुविधाएँ नहीं मिलीं।
आंदोलन का असर – स्वास्थ्य सेवाएँ ठप
अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हैं:
शहर से गाँव तक स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई
संस्थागत प्रसव ठप
टीकाकरण अभियान रुका
टीबी एवं कुष्ठ रोग जाँच बाधित
गहन नवजात शिशु चिकित्सा इकाई व आपातकालीन सेवाएँ प्रभावित
पोषण पुनर्वास केंद्र बंद
मौसमी बीमारियों की दवा वितरण व जांच ठप
मरीज इलाज और दवाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
*कर्मचारियों की 10 सूत्रीय माँगें*
प्रान्त अध्यक्ष डॉ. अमित कुमार मिरी और प्रदेश प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि 20 वर्षों से लंबित प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं:
1. संविलियन एवं स्थायीकरण
2. पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
3. ग्रेड पे निर्धारण
4. लंबित 27% वेतन वृद्धि
5. कार्य मूल्यांकन (CR) में पारदर्शिता
6. नियमित भर्ती में सीटों का आरक्षण
7. अनुकम्पा नियुक्ति
8. मेडिकल व अवकाश सुविधा
9. स्थानांतरण नीति
10. 10 लाख तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा
*कर्मचारियों का आरोप*
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने पहले मंच साझा कर समर्थन जताया था। अब तक 160 से अधिक आवेदन व निवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन 20 माह बीत जाने के बाद भी वादे पूरे नहीं हुए। शासन की बेरुखी और अड़ियल रवैये से स्वास्थ्य सेवाएँ चरमराई हुई हैं।
संघ का स्पष्ट रुख:
संघ ने स्पष्ट किया है:
“जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा।”
प्रदेश महासचिव कौसलेश तिवारी ने कहा कि 20 वर्षों की सेवा के बाद भी कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाएँ नहीं मिली हैं। यही कारण है कि वे आक्रोश और निराशा में हैं। जब तक 10 सूत्रीय माँगों पर लिखित सहमति नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।


