**बालोद में धड़ल्ले से चल रहा अवैध लकड़ी कारोबार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल**
**बालोद में धड़ल्ले से चल रहा अवैध लकड़ी कारोबार, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल**
**बालोद |** जिले में अवैध लकड़ी कटाई और कारोबार का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। खरीफ फसल की कटाई के साथ ही ग्रामीण इलाकों में लकड़ी कटाई का सिलसिला तेज हो गया है, जो बरसात तक जारी रहता है। जहां एक ओर छूट श्रेणी की लकड़ियां पंचायत की अनुमति से काटी जाती हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों की अवैध कटाई और बिक्री का खेल भी खुलेआम जारी है।
शहर के **बालोद–दल्लीराजहरा मार्ग** पर स्थित **मां दुर्गा माता मंदिर के पीछे** संचालित करीब 8-9 टिंबर दुकानों सहित अन्य स्थानों पर अर्जुन (कौहा), कसही समेत कई प्रतिबंधित लकड़ियों का भारी मात्रा में अवैध भंडारण किए जाने की जानकारी सामने आई है। ये लकड़ियां न केवल अवैध रूप से काटी जा रही हैं, बल्कि खुलेआम खरीदी-बेची भी जा रही हैं।
**प्रशासन की चुप्पी पर सवाल**
इतने बड़े स्तर पर अवैध कारोबार चलने के बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की गई है। इससे यह सवाल उठने लगा है कि कहीं इस पूरे मामले में लकड़ी माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत तो नहीं है।
**पर्यावरण और कानून व्यवस्था पर खतरा**
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा। साथ ही अवैध गतिविधियों के बढ़ने से कानून व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
**कार्रवाई की मांग तेज**
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध लकड़ी भंडारण और कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि इस पर लगाम लग सके।
**अब देखना यह होगा…**
क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करेगा, या फिर अवैध लकड़ी कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा?
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