मौजूदा हालात में जीएसटी संग्रहण विकास नहीं, डकैती है, महंगाई बढ़ने के कारण जनता मजबूरन ज्यादा टैक्स देने विवश है – कांग्रेस
घरेलू बचत न्यूनतम और आयात का जीएसटी 42 प्रतिशत बढ़ना सरकार की आर्थिक नाकामी का प्रमाण है

The narad news 24,,,,,,रायपुर/03 नवंबर 2026। रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन और आर्थिक तरक्की के झूठे दावों पर सवाल उठाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जमीनी हकीकत यह है कि यह बढ़ा हुआ टैक्स कलेक्शन जनता की खुशहाली से नहीं, बल्कि उसकी गाढ़ी कमाई को निचोड़ने से आ रहा है। महंगाई चरम पर है, इसलिए अधिक कीमत पर सामान खरीदने के कारण मजबूरी में ज्यादा जीएसटी देना पड़ रहा है। आज देश और छत्तीसगढ़ की जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी की दोहरी मार झेल रही है। लेकिन विडंबना देखिए कि भाजपा सरकार अक्टूबर महीने में 2 लाख 31 हजार करोड़ से ज्यादा का जीएसटी वसूली का जश्न मना रही है। यह जनता के विकास का नहीं, बल्कि उसकी क्रय शक्ति घटने और मजबूरी में महंगे दामों पर सामान खरीदने के कारण हुई बेहिसाब लूट का आंकड़ा है। आयात पर 42 प्रतिशत की वृद्धि यह चीख-चीख कर कह रही है कि मोदी सरकार में हमारा व्यापार संतुलन पूरी तरह तबाह हो चुका है और आम आदमी की घरेलू बचत शून्य हो गई है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि आंकड़ों और तथ्यों के आईने में यह स्पष्ट है कि केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें आम जनता की जेब पर डाका डालने का काम कर रही हैं। विगत अक्टूबर माह का जीएसटी संग्रहण 23 फीसदी की वृद्धि के साथ 2 लाख 31 हजार करोड़ रुपए पार करना और आयात पर जीएसटी में 42 प्रतिशत की भारी वृद्धि इस बात का सीधा प्रमाण है कि देश और प्रदेश में विदेशी व्यापार संतुलन पूरी तरह चरमरा गया है। घरेलू बचत देश के इतिहास में न्यूनतम स्तर पर पहुँच चुकी है, जिससे मध्यवर्गीय परिवारों और गरीबों का भविष्य असुरक्षित हो गया है। आम जनता की क्रय शक्ति लगातार घट रही है। छत्तीसगढ़ के छोटे व्यापारी और मध्यम वर्ग महंगाई और भारी-भरकम टैक्स के बोझ तले पिस रहे हैं। बेरोजगारी और आर्थिक असमानता अपने चरम पर है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार जनता का खून चूसने में अंग्रेजों को भी पीछे छोड़ चुकी है। महंगाई आसमान छू रही है और मजबूरी में खरीदे जा रहे महंगे सामान पर सरकार तिजोरी भर-भर के टैक्स वसूल रही है। छत्तीसगढ़ के मेहनतकश लोग, व्यापारी और आम परिवार अपनी जीवनभर की बचत खो चुके हैं। देश की घरेलू बचत न्यूनतम स्तर पर पहुँच गई है, और भाजपा सरकार जश्न मना रही है कि जनता लूट रही है और उसका टैक्स बढ़ रहा है। विकास टैक्स बढ़ने से नहीं, जनता के पास पैसा बचने से होता है। जब देश की घरेलू बचत सबसे निचले पायदान पर है, तो इसे विकास नहीं, जनता की जेब पर डकैती कहा जाता है। जनता को लूटकर तिजोरी भरना ही सबका साथ, सबका विकास है? यह सरकार विकास के नाम पर आंकड़े चमका रही है, लेकिन सच यह है कि आज देश का आम आदमी टैक्स के बोझ तले पिस रहा है।



