फिटनेस शुल्क 800 रुपये तो 5 हजार की वसूली किसके खाते में जा रही? परिवहन विभाग जवाब दे – कांग्रेस
फिटनेस से लेकर लाइसेंस और वाहन ट्रांसफर तक बिना चढ़ोत्तरी काम नहीं होने की शिकायतें, परिवहन विभाग वसूली का अड्डा बना

The narad news 24,,,,रायपुर/15 अक्टूबर 2026। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि परिवहन विभाग जनता को सुविधाएं देने के बजाय वसूली का अड्डा बन गया है। जब वाहन फिटनेस का निर्धारित शुल्क 800 रुपये है, तो फिटनेस कराने पहुंचे वाहन मालिकों से प्रति वाहन 5 हजार रुपये तक वसूली की शिकायतें क्यों मिल रही हैं? निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक वसूली की यह रकम आखिर किसके खाते में जा रही है? क्या यह सरकार के संरक्षण में चल रहा कोई नया वसूली तंत्र है? सड़कों पर चलने वाले वाहनों की फिटनेस का उद्देश्य लोगों की जान सुरक्षित रखना है, लेकिन यदि पैसे लेकर अनफिट और कंडम वाहनों को भी फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है। जिन वाहनों की लाइटें खराब हैं, टायर जर्जर हैं और जो बीच सड़क पर कहीं भी बंद हो जाते हैं, वे फिटनेस प्रमाणपत्र कैसे प्राप्त कर रहे हैं? क्या वाहनों की वास्तविक जांच हो रही है या सिर्फ रकम लेकर प्रमाणपत्र बांटे जा रहे हैं? इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि परिवहन विभाग के दफ्तरों से लेकर सड़कों और परिवहन नाकों तक अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। वाहन चालकों का आरोप है कि रात के अंधेरे में वाहनों को रोककर निजी व्यक्तियों के माध्यम से पैसे मांगे जाते हैं। पैसे देने से इनकार करने पर मारपीट और दुर्व्यवहार की जाती हैं। परिवहन विभाग के कामकाज में निजी व्यक्तियों की भूमिका क्या है? उन्हें किस अधिकारी के आदेश पर वाहनों को रोकने, जांच करने या पैसे वसूलने का अधिकार दिया गया है?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि लाइसेंस बनवाना हो, वाहन का स्वामित्व हस्तांतरित कराना हो या परिवहन विभाग से संबंधित अन्य काम करवाना हो, निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद भी लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आम नागरिकों को तब तक परेशान किया जाता है जब तक वे कथित तौर पर अतिरिक्त रकम देने को मजबूर न हो जाएं। यदि सरकारी दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारियों के साथ निजी व्यक्ति बैठकर वसूली कर रहे हैं, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि परिवहन उड़नदस्ते का काम यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है, न कि वाहन चालकों में भय पैदा कर अवैध वसूली करना। यदि उड़नदस्ते या परिवहन नाकों पर निजी व्यक्तियों के जरिए वसूली हो रही है, तो उनकी पहचान कर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए। सरकारी अधिकारों का इस्तेमाल किसी निजी वसूली तंत्र को चलाने के लिए नहीं होने दिया जा सकता। फिटनेस जांच का ठेका लेने वाली निजी कंपनी के विरुद्ध मिल रही वसूली संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। फिटनेस शुल्क और वाहन मालिकों से ली जा रही वास्तविक राशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। प्रत्येक परिवहन कार्यालय, फिटनेस केंद्र और नाके पर निर्धारित शुल्क की सूची प्रदर्शित हो तथा हर भुगतान की अनिवार्य रसीद दी जाए। अवैध वसूली में संलिप्त पाए जाने वाले निजी व्यक्तियों, कंपनी संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।



