1 माह से राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का पद खाली, क्या यही है यूपीएससी की तर्ज? – कांग्रेस

THE NARAD NEWS 24,,,,रायपुर,,,,,/12 अक्टूबर 2026। महिने भर से राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद खाली पड़ा है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पीएससी 2025 के मुख्य परीक्षा का इंटरव्यू स्थगित कर दिया गया है। पीएससी 2025 की सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परीक्षा में 1ः3 का पालन नहीं किया गया, इंटरव्यू के निर्धारित संख्या में अभ्यर्थी इंटरव्यू नहीं पहुंच पाये। पीएससी की सब इंस्पेक्टर परीक्षा में अजीबो-गरीब नाम के अभ्यर्थी के उत्तीर्ण घोषित किये गये, क्या यही यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी की परीक्षा है। भाजपा की सरकार बनने के बाद पीएससी की भर्ती परीक्षा को मजाक बनाकर रख दिया गया है। पीएससी की उत्तर पुस्तिकाएं कौन जांच रहा है, उनके नाम सोशल मीडिया में फैला हुआ था।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आयोग ने 2025 की परीक्षा को मुख्य परीक्षा में 265 पदों के विरूद्ध 795 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू के लिये चयनित नहीं किया है। आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिये योग्य माना है। साक्षात्कार 187 अभ्यर्थी कम पहुंचे है, जो 1ः3 के नियम के विरुद्ध है। पीएससी का कहना है कि 187 अभ्यर्थी न्यूनतम 66 और 46 नंबर नहीं प्राप्त कर पाये है। आयोग 2025 के मुख्य परीक्षा की कॉपी भी अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराये ताकि अभ्यर्थी उनको दिये गये नंबरों का स्वमूल्यांकन कर संतुष्ट हो सके।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 2024 की परीक्षा में अभ्यर्थियों की जो उत्तर पुस्तिका सामने आयी है, उसके अनुसार मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़िया सामने आई थी। अभ्यर्थियो को नंबर गलत दिये गये थे। इसलिये यदि आयोग का दावा है कि उसके मूल्यांकन में 187 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिये योग्य नही है तो उसे इसे प्रमाणित करने उत्तर पुस्तिकाये अभ्यर्थियो को इंटरव्यू के पहले उपलब्ध करवाना चाहिये।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सीजीपीएससी स्पष्ट करे कि इंटरव्यू स्थगित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग को लेकर उठे सवालों की स्थिति क्या है, नई तारीख कब घोषित होगी तथा अभ्यर्थियों की आशंकाओं का निराकरण किस प्रक्रिया से किया जाएगा। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल परीक्षा कराने से नहीं, बल्कि हर चरण में पारदर्शिता से सुनिश्चित होना चाहिए।



