इसरो, डिफेंस सेक्टर और डीआरडीओ की तकनीकी और संस्थागत क्षमता का निजीकरण राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है – कांग्रेस

The narad news 24,,,रायपुर,,,,/17 अक्टूबर 2026। देश की सुरक्षा, स्पेश और रक्षा प्रौद्योगिकी के अत्यंत महत्वपूर्ण संस्थानों इसरो, डिफेंस सेक्टर और डीआरडीओ की तकनीकी और संस्थागत क्षमता का निजीकरण की प्रक्रिया को राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मिसाइल, उपग्रह और संवेदनशील रक्षा प्रौद्योगिकियों को निजी हाथों में सौंपकर भाजपा सरकार देश की सुरक्षा और सामरिक गोपनीयता से खिलवाड़ कर रही है। सरकार अनावश्यक निजीकरण को बढ़ावा देकर इन रणनीतिक संस्थानों को कमजोर कर रही है। इसरो और डीआरडीओ केवल संस्थान ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा, संप्रभुता और वैज्ञानिक स्वाभिमान से जुड़ा एक बेहद गंभीर विषय हैं। जिन ISRO और DRDO जैसी संस्थाओं को देश के आम नागरिकों के टैक्स के पैसे से छह दशकों में खड़ा किया गया, मोदी सरकार उन्हें अपने चहेते उद्योगपतियों के हवाले करने पर आमादा है। यह फैसला न केवल हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक गोपनीयता के लिए बड़ा खतरा है, बल्कि हमारे देश और छत्तीसगढ़ के युवाओं से सरकारी नौकरी और आरक्षण छीनने का षड्यंत्र है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि जवाहरलाल नेहरू जी के दूरदर्शी नेतृत्व में INCOSPAR, जो बाद में ISRO बना और DRDO जैसे संस्थानों की नींव रखी गई थी, जिसने भारत को वैश्विक स्तर पर आत्मनिर्भर बनाया। भाजपा नीत सरकार केवल बनी-बनाई राष्ट्रीय संपत्तियों का सौदा कर रही है। देश के करदाताओं के पैसे से विकसित 60 साल की शोध बौद्धिक संपदा (IP) और परिसंपत्तियों को चुनिंदा उद्योगपतियों को औने-पौने दाम पर बेचा जा रहा है। यह केवल निजीकरण नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ और युवाओं के आरक्षण पर सीधा डाका है। छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर सरगुजा तक के प्रतिभावान युवा, जो IITs, NITs और सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलकर ISRO और DRDO में जाने का सपना देखते हैं, भाजपा सरकार उनके सपनों का सौदा अपने ‘मित्रों’ से कर रही है। क्या देश की सुरक्षा और खुफिया मिसाइल टेक्नोलॉजी को मुनाफाखोरी की वस्तु बनाना सही है? क्या यह रक्षा क्षेत्र का सुधार है या आरक्षण खत्म करने की साजिश?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छह दशकों तक करदाताओं के पैसों से विकसित की गई ISRO और DRDO की अरबों-खरबों की तकनीक और अनुसंधान को चंद उद्योगपति मित्रों को किस कीमत पर और क्यों सौंपा जा रहा है? रक्षा और अंतरिक्ष जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्रों में निजी कंपनियों के आने से देश की रणनीतिक गोपनीयता और संप्रभुता को खतरा है। छत्तीसगढ़ के जो होनहार युवा वैज्ञानिक और इंजीनियर बनने का सपना देखते हैं, निजीकरण के बाद उनके रोजगार और भविष्य की क्या गारंटी है? कांग्रेस ने देश को प्ैत्व् और क्त्क्व् जैसी विश्वस्तरीय संस्थाएँ दीं; भाजपा बताए कि 10-12 सालों में उसने देश की संपत्तियों को बेचने के अलावा कौन सा नया राष्ट्रीय संस्थान खड़ा किया?



