रायपुर की एसकेएस इस्पात कंपनी में मजदूरों का हंगामा: वेतन नहीं मिलने से फूटा गुस्सा, बाल श्रम के आरोपों ने बढ़ाई गंभीरता
रायपुर, छत्तीसगढ़
रायपुर, छत्तीसगढ़। राजधानी रायपुर के समीप सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एसकेएस इस्पात प्राइवेट लिमिटेड एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। कंपनी में कार्यरत लगभग 150 मजदूरों ने वेतन भुगतान में देरी और प्रबंधन की कथित उदासीनता के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूरों का आरोप है कि पिछले एक माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने परिवार चलाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है।
वेतन की मांग को लेकर कंपनी गेट पर प्रदर्शन
मजदूरों ने बड़ी संख्या में कंपनी के मुख्य द्वार पर एकत्र होकर प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी श्रमिकों का कहना है कि कई बार वेतन की मांग करने के बावजूद उन्हें केवल आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। उनका आरोप है कि ठेकेदार उनकी शिकायतें सुनने तक के लिए सामने नहीं आ रहा है और कंपनी प्रबंधन भी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा।
सड़क पर उतरे मजदूर, वाहनों के सामने दिया धरना
अपना बकाया वेतन दिलाने की मांग को लेकर कई मजदूर कंपनी से निकलने वाले वाहनों के सामने बैठ गए। कुछ श्रमिक सड़क पर लेटकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उनका पूरा बकाया भुगतान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एमडी और सुरक्षा कर्मियों पर धमकाने के आरोप
प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने कंपनी के एमडी और सुरक्षा कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। श्रमिकों का कहना है कि उनकी मांगों को सुनने के बजाय उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। कुछ मजदूरों ने धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया है। वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी तक दी गई। मजदूरों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के वीडियो और फोटो साक्ष्य मौजूद हैं।
पुलिस पहुंची मौके पर, निष्पक्षता पर उठे सवाल
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन भी मौके पर पहुंचा और मजदूरों से गेट खाली करने की अपील की। हालांकि कुछ श्रमिकों ने आरोप लगाया कि पुलिस उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बजाय कंपनी के पक्ष में खड़ी दिखाई दी। इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
बाल श्रम के आरोपों से मामला और गंभीर
प्रदर्शन के दौरान एक और गंभीर आरोप सामने आया। मीडिया की मौजूदगी में कंपनी परिसर में एक कथित नाबालिग बालक के काम करने की बात सामने आई। आरोप है कि जब इस संबंध में सुरक्षा कर्मियों से जानकारी ली गई तो बाल श्रम की आशंका व्यक्त की गई। बताया जा रहा है कि मीडिया के पहुंचते ही उक्त बालक को परिसर से बाहर भेज दिया गया। यदि जांच में यह मामला सही पाया जाता है तो यह श्रम कानूनों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
पहले भी विवादों में रहा है औद्योगिक क्षेत्र
जानकारी के अनुसार सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों की मांगों और श्रमिक विवादों को लेकर पहले भी कई बार तनाव की स्थिति बन चुकी है। हाल के महीनों में हुए आंदोलनों और विवादों ने श्रमिकों तथा उद्योग प्रबंधन के बीच बढ़ती दूरी को उजागर किया है।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन मजदूरों को उनका बकाया वेतन दिलाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करेगा? क्या कंपनी प्रबंधन और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ श्रम कानूनों के तहत कार्रवाई होगी? और यदि बाल श्रम के आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों पर क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे?
फिलहाल मजदूर अपने अधिकारों और मेहनत की कमाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। श्रमिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, बकाया वेतन का तत्काल भुगतान तथा पूरे मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पूरे घटनाक्रम पर अब प्रशासन और श्रम विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें
टिकी हुई हैं



