“हस्ताक्षर नहीं तो काम नहीं” : एपीएल अपोलो उद्योग पर मजदूरों का गंभीर आरोप
जनसुनवाई से पहले सहमति पत्रों पर दबाव? एपीएल अपोलो विस्तार परियोजना पर उठे सवाल

एपीएल अपोलो की जनसुनवाई पर बड़ा विवाद: मजदूरों से दबाव में कराए गए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के आरोप

तिल्दा-नेवरा। बलौदा बाजार जिले के सिमगा जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रिंगनी में संचालित एपीएल अपोलो बिल्डिंग प्रोडक्ट्स उद्योग के प्रस्तावित विस्तार के लिए आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई अब विवादों के घेरे में आ गई है। उद्योग प्रबंधन पर आरोप है कि जनसुनवाई से पहले कर्मचारियों और उनके परिजनों से दबाव बनाकर सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करवाए गए।
मजदूरों के बयानों और सामने आए वीडियो के अनुसार, उद्योग विस्तार के समर्थन में सहमति पत्र भरने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया। आरोप है कि कर्मचारियों से कहा गया कि वे स्वयं हस्ताक्षर करें और अपने परिवार के सदस्यों से भी सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर जमा करें। कुछ मजदूरों ने दावा किया कि सहमति पत्र जमा नहीं करने पर नौकरी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
मजदूरों का कहना है कि उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया गया कि यदि वे उद्योग विस्तार के समर्थन में सहमति नहीं देंगे तो उनके रोजगार पर असर पड़ सकता है। इन आरोपों के बाद पर्यावरण जनसुनवाई की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह जनसुनवाई की मूल भावना के विपरीत होगा। उनका कहना है कि जनसुनवाई का उद्देश्य प्रभावित लोगों की स्वतंत्र और निष्पक्ष राय प्राप्त करना है, लेकिन यदि पहले से समर्थन जुटाने के लिए दबाव बनाया गया हो तो वास्तविक जनमत प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, इन आरोपों पर उद्योग प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की जांच और उद्योग प्रबंधन के पक्ष के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



