जंगल कटे, तेंदुआ भटके… गिधनी में खौफ का साया, वन विभाग पर लापरवाही के आरोप
गांव बना छावनी, जनजीवन अस्त-व्यस्त
गरियाबंद छत्तीसगढ़ 
जिले के छुरा नगर मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गिधनी इन दिनों तेंदुए के आतंक से सहमा हुआ है। गांव की गलियों, चौक-चौराहों और रिहायशी इलाकों में खुलेआम तेंदुए की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि लोग घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।
महिलाएं हैंडपंप से पानी भरने जाने से कतरा रही हैं, वहीं बच्चे और बुजुर्ग घरों में कैद होकर रह गए हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव सन्नाटे में डूब जाता है।
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वन विभाग पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए की लगातार मौजूदगी की सूचना पाण्डुका वन परिक्षेत्र अधिकारी को दी गई थी, लेकिन विभाग ने सिर्फ मुनादी कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली।
अब तक न कोई रेस्क्यू टीम पहुंची है और न ही निगरानी के लिए कोई ठोस व्यवस्था की गई है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
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पर्यावरण असंतुलन बना वजह
ग्रामीणों ने जंगलों की अंधाधुंध कटाई को इस समस्या की बड़ी वजह बताया है। उनका कहना है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास खत्म होने के कारण अब जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।
तेंदुए का गांव में खुलेआम घूमना इसी पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम माना जा रहा है।
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गांव बना छावनी, जनजीवन अस्त-व्यस्त
तेंदुए के डर से गांव का सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
खेतों की ओर जाना बंद
बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद
शाम होते ही लोग घरों में कैद
हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।
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20 साल पुरानी घटना फिर आई याद
ग्रामीणों ने करीब 20 वर्ष पहले ग्राम निशानी दादर की घटना को याद किया, जब एक तेंदुए ने क्षेत्र में आतंक मचाया था। सूचना के बावजूद वन विभाग समय पर नहीं पहुंचा था, और अंततः ग्रामीणों को ही जान बचाने के लिए कदम उठाना पड़ा था।
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ग्रामीणों की चेतावनी और मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और कोई हादसा हुआ, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।
मुख्य मांगें:
तत्काल रेस्क्यू टीम भेजी जाए
गांव में पिंजरा लगाया जाए
रात में नियमित गश्त कराई जाए
निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए
अवैध जंगल कटाई पर सख्ती से रोक लगे
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📢 निष्कर्ष
ग्राम गिधनी में तेंदुए की मौजूदगी ने लोगों की जिंदगी को भय में जकड़ दिया है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस गंभीर स्थिति को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।
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✍️ (द नारद न्यूज 24 के लिए विशेष रिपोर्ट)
