इंसानों और वन्यजीव संघर्ष की जिम्मेदार भाजपा सरकार, कॉर्पोरेट परस्त नीतियों ने जंगल उजाड़े, नदियाँ जहरीली की – कांग्रेस

The narad news 24,,,,,,रायपुर/18 अक्टूबर 2026। बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के लिए भाजपा सरकार की कॉरपोरेट परस्त नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ एक भीषण पर्यावरणीय और मानवीय त्रासदी के मुहाने पर खड़ा है। भाजपा सरकार की अदूरदर्शी नीतियों, अंधाधुंध अवैध खनन और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण हमारे सिकुड़ते जंगल और प्रदूषित नदियाँ कराह रही हैं। बीते एक हफ्ते से आधा दर्जन से ज्यादा लोगों ने जान गंवाई है। धमतरी के बोरई और कारीपानी क्षेत्र के साथ कोंडागांव की सीमा पर तेंदुए के हमले से गर्भवती महिला सहित दो लोगों की मौत हो गई, 16 लोग घायल हुए, महासमुंद के बागबाहरा वन क्षेत्र के झिटकी गांव में तेंदुआ रात में एक घर में घुस गया, 2 पुरुषों और 4 महिला समेत 6 लोग घायल हो गए, कांकेर के माकड़ी सिंगराय क्षेत्र में भालू ने एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया, जशपुर के तपकरा वन परिक्षेत्र में दतैल हाथियों को खदेड़ने के दौरान कुचलने से एक नाबालिक की मौत हुई सरकार की दुर्भावना और प्रशासनिक नाकामी का नतीजा है कि आज राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष चरम पर है। हमारे आदिवासी और ग्रामीण भाई-बहन अपनी जान गँवा रहे हैं और बेजुबान जानवर तड़प-तड़प कर मरने पर मजबूर हैं। साय सरकार को जवाब देना होगा कि आखिर छत्तीसगढ़िया जनता के खून से किसका खजाना भरा जा रहा है?

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार पर्यावरण संरक्षण, वनों की सुरक्षा और हरियाली बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। जमीनी हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ में कॉर्पोरेट मित्रों को लाभ पहुँचाने के लिए अंधाधुंध खनन और संसाधनों का असंतुलित दोहन जारी है। जंगलों के सिकुड़ने और हाथियों के कॉरिडोर में अवैध खनन, उद्योगों के हस्तक्षेप के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष भयावह रूप ले चुका है। ग्रामीणों की जान जा रही है, फसलें तबाह हो रही हैं और बेजुबान जानवर भी मर रहे हैं। एलिफेंट रिजर्व और वन्यजीव गलियारे के लिए निर्धारित फंड एवं सुरक्षा तंत्र में भारी लापरवाही बरती जा रही है। शिवनाथ, हंसदेव, खारुन, महानदी, अरपा, शबरी, गंडकी और इंद्रावती जैसी प्रमुख नदियों में बिना ट्रीटमेंट के औद्योगिक अपशिष्ट बहाया जा रहा है। आदिवासियों से जल, जंगल, जमीन की रक्षा का वादा करने वाली भाजपा सरकार आज हसदेव और अन्य क्षेत्रों में वनों की कटाई को मूकदर्शक बनकर देख रही है। सरगुजा, रायगढ़, कोरबा और बस्तर अंचल के ग्रामीण रातों को खौफ में जीने को मजबूर हैं।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने ‘लेमरू एलिफेंट रिजर्व’ को आकार दिया, हाथियों और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए रेडियो कॉलरिंग और एआई आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया। नरवा संवर्धन योजना से जंगल के भीतर नालों का जीर्णोद्धार कर वन्यजीवों के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था जंगल के अंदर ही सुनिश्चित की थी, जिससे जानवर बस्तियों की तरफ न आएँ। भाजपा के आते ही नीतियाँ ठप पड़ गईं और संसाधनों का सौदा शुरू हो गया। पूंजीपतियों के आगे समर्पण कर चुकी यह सरकार मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जनता के साथ हो रहे अन्याय पर खामोश है। सिकुड़ते जंगलों के कारण तेंदूपत्ता, महुआ, और लघु वनोपज संग्राहकों की आजीविका पर भी सीधा प्रहार हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़िया पहचान की आत्मा हमारे जंगल और नदियाँ हैं। भाजपा सरकार दिल्ली के इशारे पर छत्तीसगढ़ महतारी की कोख, प्राकृतिक संसाधनों को बेच रही है। यह विकास नहीं, विनाश है! अगर यह विकास है तो इसका मुनाफा उद्योगपतियों को और लाशें आदिवासियों की क्यों? विगत पौने तीन वर्षों में मानव वन्यजीव संघर्ष में बेतहाशा वृद्धि हुई है सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ी बड़ी संख्या में वन्य प्राणी भी मारे गए, मौत के आंकड़े दोनों तरफ से लगातार बढ़ रहे हैं लेकिन यह सरकार सोई हुई है।



