अघोषित आपातकाल में लोकतंत्र खतरे में, तो तथाकथित लोकतंत्र सेनानी कहां छिपे हैं? क्या इनका लोकतंत्र प्रेम सिर्फ पेंशन लेने तक सीमित है?

THE NARAD NEWS 24,,,,रायपुर,,,,/11/अक्टूबर/26/प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात हैं। लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, संवैधानिक अधिकारों का हनन हो रहा है और जनता के वोट की ताकत पर सवाल उठ रहे हैं। भाजपा शासित राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन रोकने के लिए बैरिकेडिंग, सड़कों पर कीलें लगाने, यातायात बाधित करने और इंटरनेट बंद करने जैसी कार्रवाई की शिकायतें सामने आ रही हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी हमला हो रहा हैं। ऐसे समय में लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने वाले तथाकथित लोकतंत्र सेनानी आखिर कहां गायब हैं? क्या उनका लोकतंत्र प्रेम सिर्फ पेंशन लेने की तारीख तक ही जागता है?

प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि जब युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, बेटियां न्याय मांगती हैं और नागरिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तब उन्हें रोकने, गिरफ्तार करने और मुकदमों में उलझाने की शिकायतें सामने आती हैं। लेकिन लोकतंत्र की दुहाई देने वाले तथाकथित सेनानी इन मुद्दों पर मौन साधे हुए हैं। जो लोग लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर पेंशन लेते हैं, वे आज लोकतंत्र पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ आवाज उठाने से क्यों डर रहे हैं?
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि तथाकथित लोकतंत्र सेनानियों में से अनेक की राजनीतिक निष्ठा लोकतांत्रिक मूल्यों से अधिक संघ और भाजपा की विचारधारा के प्रति रही है। आज उनकी चुप्पी इस सवाल को और गंभीर बनाती है कि क्या उनका लोकतंत्र प्रेम सिद्धांतों पर आधारित है या राजनीतिक सुविधा पर। जनता के टैक्स से मिलने वाली पेंशन किसी को अपने लोकतांत्रिक दायित्वों से मुक्त नहीं करती। लोकतंत्र कोई तमगा नहीं, जिम्मेदारी है; और इस जिम्मेदारी की असली परीक्षा सत्ता के खिलाफ उठने वाली जनआवाज के समय होती है।
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है। संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता, मीडिया की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को भाजपा सरकार रोक रही है। लोकतंत्र की परीक्षा के इस दौर में जनता को पेंशन लेने वाले तमगेधारी नहीं, संविधान और नागरिक अधिकारों के पक्ष में खड़े होने वाले लोग चाहिए।तथाकथित लोकतंत्र सेनानियों को बताना चाहिए कि जब लोकतंत्र खतरे में है, तब वे जनता के साथ खड़े हैं या सत्ता की सुविधा के साथ। जनता सब देख रही है कि लोकतंत्र की रक्षा के सवाल पर कौन बोल रहा है और कौन खामोशी ओढ़े बैठा है।



