पेसा पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आदिवासी संस्कृति के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर : सत्यनारायण सिंह

The Narad news 24,,,,,,,,,,,रायपुर। भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सिंह ने पीईएसए (पेसा) कानून के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वागतेय बताते हुए कहा है कि यह निर्णय इसे छत्तीसगढ़ के करोड़ों आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और स्वाभिमान के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। श्री सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 2025 के फैसले को बरकरार रखकर न केवल ग्रामसभाओं की अहम भूमिका व उसके निर्णयों के महत्व को रेखांकित किया है, अपितु धर्मान्तरण की साजिशों को दिए जा रहे राजनीतिक संरक्षण को ताने-बाने को तार-तार कर दिया है।

भाजपा अजजा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने काँकेर में ग्राम सभाओं द्वारा बाहरी लोगों/धर्मांतरण प्रचारकों के प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ याचिका खारिज कर पारंपरिक स्वशासन और सांस्कृतिक संरक्षण के आदिवासी अधिकारों को मजबूती दी है। अब यह बात आईने की तरह साफ है कि ग्राम सभाएं केवल नाम की नहीं, बल्कि ‘स्वशासन’ की असली शक्ति रखती हैं। ग्राम सभाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और रीति-रिवाजों की रक्षा करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। श्री सिंह ने कहा कि लंबे समय से बाहरी तत्वों और मिशनरी ताकतों द्वारा भोले-भाले आदिवासी भाई-बहनों का धर्मांतरण कराकर उन्हें अपनी मूल संस्कृति से विलग करने का जो कुत्सित प्रयास किया जा रहा था, उस पर अब सख्ती से रोक लगेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आदिवासियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनकी पहचान को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता का जिक्र कर श्री सिंह ने मुख्यमंत्री श्री साय तथा उपमुख्यमंत्री/गृह मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने न्यायालय में आदिवासियों के पक्ष को मजबूती से रखने के लिए आभार भी व्यक्त किया।
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